Exam, deadline, झगड़ा, बुरी ख़बर। बेचैनी के पलों में बहुत लोग बिल्कुल भूख न होने पर भी रसोई की तरफ़ चल देते हैं। खाना कुछ मिनट सुकून देता है, फिर guilt आता है, जो और बेचैनी पैदा करता है।
संकेत कि यह भूख नहीं, बेचैनी है
- आप जल्दी-जल्दी खाते हैं, स्वाद भी ठीक से नहीं आता।
- खाने का मन किसी विचार या चिंता के साथ आता है।
- पेट भरने के बाद भी खाते रहते हैं।
- बाद में guilt या पछतावा होता है।
उसी पल की तुरंत मदद
- रुकें और नाम दें: "मैं बेचैन हूँ, भूखा/भूखी नहीं।" बस कह देने से ही इच्छा कमज़ोर पड़ती है।
- एक मिनट धीरे साँस लें: 4 गिनती में अंदर, 2 रोकें, 6 में बाहर।
- जगह बदलें: रसोई से बाहर जाएँ, मुँह धोएँ, गली का एक चक्कर लगाएँ।
- जो चिंता है उसे लिखें: दिमाग़ से निकालकर काग़ज़ पर रखने से मन शांत होता है।
- फिर भी खाना हो तो सोचकर खाएँ: एक portion, थाली में, बैठकर।
कब मदद लें
अगर आप अक्सर काबू खोने के एहसास के साथ बहुत ज़्यादा खाते हैं, या बेचैनी आपकी ज़िंदगी में रुकावट बन रही है, तो किसी psychologist या डॉक्टर से मिलें। इसका इलाज है, और यह इच्छाशक्ति की कमी नहीं है।
यह जानकारी केवल सामान्य समझ के लिए है और डॉक्टर या dietitian की सलाह की जगह नहीं लेती।