अच्छे इरादे craving आते ही ग़ायब हो जाते हैं। Psychology में पढ़ी गई एक तकनीक इसमें मदद करती है: हालात आने पर आप क्या करेंगे, यह पहले से एक वाक्य में तय कर लेना। इसे implementation intention कहते हैं, लेकिन "अगर... तो" plan कहना आसान है।
यह कैसे काम करता है
"मैं बेहतर खाऊँगा/खाऊँगी" कहने की बजाय तय करें: "अगर ऐसा हुआ, तो मैं यह करूँगा/करूँगी"। Research बताती है कि किसी काम को ठोस हालात से जोड़ने पर उसके होने की संभावना बढ़ जाती है, क्योंकि पल आने पर फ़ैसला पहले से तय होता है।
तैयार उदाहरण
- अगर मैं भूखा/भूखी घर पहुँचूँ, तो फ्रिज खोलने से पहले एक फल खाऊँगा/खाऊँगी।
- अगर office में कोई मिठाई दे, तो कहूँगा/कहूँगी "अभी नहीं, शुक्रिया" और पानी पिऊँगा/पिऊँगी।
- अगर रात के खाने के बाद sofa पर बैठूँ, तो पहले ब्रश करूँगा/करूँगी।
- अगर खाना order करूँ, तो protein और सलाद वाली dish चुनूँगा/चुनूँगी।
- अगर किसी खाने में plan से हट जाऊँ, तो उसे log करके अगले खाने से वापस आऊँगा/आऊँगी।
अपना plan कैसे बनाएँ
- वह हालात सोचें जो आपको सबसे ज़्यादा गिराता है।
- एक छोटा और मुमकिन काम चुनें।
- वाक्य लिखें और एक हफ़्ते तक नज़र के सामने रखें।
स्रोत
- Gollwitzer PM. Implementation intentions: strong effects of simple plans. American Psychologist. 1999;54(7):493-503.
यह जानकारी केवल सामान्य समझ के लिए है और डॉक्टर या dietitian की सलाह की जगह नहीं लेती।